शिवनाथ नदी तट पर अवैध मिट्टी खनन कर बेधड़क ,बेखौफ चल रहा हैं कई अवैध ईंट भट्ठे, प्रशासन क्यों चुप्पी साधे बैठा..?

दिनेश पाटले



मस्तूरी। विधानसभा के शिवनाथ नदी के तट पर अवैध रूप से ईंट बनाने का काम को बेखौफ किया जा रहा है। इसकी जानकारी राजस्व् सहित खनिज विभाग के अधिकारियों को है लेकिन कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसके चलते अवैध रूप से ईंट भट्ठे संचालित करने वालों के हौसले बुलंद है ,इस वजह से शिवनाथ नदी के तट पर जगह-जगह अवैध ईट भट्टा का संचालन किया जा रहा है।



विधानसभा क्षेत्र के जोंधरा, भिलौनी, शिवटिकारी,मचहा,मनवा, कुकुरदी,आमगांव,आमाकोनी, इटवा पाली, लावर,भोठीडीह, दर्रीघाट, कर्रा,सहीत क्षेत्र में संचालित लगभग 25-30 से अधिक ईंट भट्ठे अवैध रूप से संचालित है। यहां पर किसी भी ईंट भट्ठे के लिए रायपुर, बिलासपुर, स्थित पर्यावरण संरक्षण समिति से सहमति पत्र नहीं ली गई है बावजूद ईंटभट्ठे जगह-जगह दहक रहे हैं। आसपास के लोगों का कहना है कि ईंटभट्ठा पर्यावरण संरक्षण समिति के मापदंड पर खरा नहीं उतरते इसके कारण ही किसी को भी ईंटभट्ठा संचालन के लिए अनुमति नहीं दी गई है, अवैध ईट भट्टे पर कार्रवाई तक नहीं की जाती है। ज्ञात हो कि ईट भट्टे का लोगों पर किसी प्रकार से दुष्प्रभाव नहीं हो , दुर्घटना नहीं हो इसलिए ईंटभट्ठे को घनी आबादी से कम से कम तीन किमी दूर होना चाहिए लेकिन यहां तो इसके विपरीत अधिकतर ईटभट्ठे घनी आबादी के बीच ही स्थापति है। नदी किनारे गांव के आसपास अपने जमीन पर या फिर दूसरे के जमीन पर किराया लेकर इर्टभट्ठे बना लिए हैं। लोगों ने बताया कि स्वयं के मकान निर्माण करने के नाम पर बड़े पैमाने पर ईंट भट्ठे का संचालन कर रहे हैं। अवैध निर्माण कार्य को रोकने का कार्य खनिज विभाग की है लेकिन कार्रवाई नहीं की जाती है। जोंधरा में मध्य प्रदेश के रीवा से आए कुमार जाति के लोग राजस्व विभाग के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए नियम से अधिक नदी के किनारे को खुदाई कर अधिक मात्रा में ईट बनाने का कार्य कर रहे हैं। और उन्हें देख अन्य लोग भी कुम्हार जाति को मिले छूट का लाभ रसूखदार लोग उठा रहें हैं। और लाल ईंट का अवैध निर्माण कर मोटी कमाई करने में जुटे हैं। शासन-प्रशासन द्वारा आए दिन खनिज विभाग को अवैध रूप से संचालित होने वाले ईंट भट्ठों पर कार्रवाई करने का दिशा-निर्देश दिया जाता है। लेकिन विभाग के उदासीनता के वजह से उचित करवाही नहीं हो पा रही है।ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों ईंट भट्ठे का कारोबार बगैर विभागीय अनुमति व रायल्टी जमा किए धड़ल्ले से चल रहा है। इससे खनिज विभाग को लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है। 


 ऐसे ईंट भट्ठों पर न तो प्रशासनिक लगाम लग पा रहा है और न ही किसी तरह रायल्टी वसूली हो पा रही है। तहसील क्षेत्र के अधिकतर गांवों में अवैध ईंट भट्ठों का कारोबार धड़ल्ले से जारी है। शासन-प्रशासन के नियम कायदे को ईंट भट्ठे के संचालकों ने ताक पर रख दिया है। इसके चलते वे न तो विभाग से किसी तरह अनुमति लेना जरुरी समझते हैं और न ही रायल्टी की राशि जमा करते हैं। गांव-गांव में लोग ईंट बना रहे हैं, मगर खनिज विभाग की अनदेखी से ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इससे शासन को लाखों रुपयों के खनिज रायल्टी का नुकसान हो रहा है जबकि लाल ईट बनाने वाले ईट भट्ठा संचालकों द्वारा कई जगह ईट भट्टे का निर्माण कर लाखों रूपयें की कमाई की जा रही है, वहीं पर्यावरण को दूषित किया जा रहा है, जबकि ईट भट्ठा के लिए पहले खनिज विभाग व पर्यावरण से इसकी मंजूरी लेकर ईट बनाने का कार्य किया जाता है, लेकिन इस क्षेत्र के रसूखदारों द्वारा बिना स्वीकृति लिए ही ईट भट्ठे का संचालन किया जा रहा है।



वहीं इस मामले में मस्तूरी एसडीएम महेश शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि क्षेत्र में चल रहे अवैध भट्ठे और नदी के किनारे से अवैध मिट्टी खनन कर ईट बनाने वालों के ऊपर माइनिंग विभाग के द्वारा करवाही करवाने की बात कही है

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