आत्मानंद विद्यालयों में प्रवेश में संवैधानिक आरक्षण की अवहेलना बर्दास्त नहीं होगा : अजाक्स

दिनेश पाटले



लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ के पत्र क्रमांक/ सेजेस एकमिशन/2023-24/05 नया रायपुर दिनांक 05-04-2023 द्वारा जारी स्वामी आत्मानंद स्कूल प्रवेश नियम विसंगतियों से युक्त है   उपरोक्त उपरोक्त विसंगति पर छत्तीसगढ़ अजाक्स ने संज्ञान लिया है प्रांताध्यक्ष डा लक्ष्मण भारती  ने मान  मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर शासन का ध्यान आकृष्ट कराया है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पूरे राज्य में 2023-24 से 380 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिन्दी एवं अंग्रेजी माध्यम विद्यालय का संचालन किया जा रहा है निसंदेह शिक्षा के क्षेत्र में यह एक उत्कृष्ट कदम है।


      चूँकि  स्वामी आत्मानंद विद्यालयों  में निर्धारित सीटों में ही विद्याथियों को प्रवेश दिये जाने का नियम है। जिसके अंतर्गत कक्षा नर्सरी और पहली से बारहवीं तक की पढ़ाई की सुविधा है यथा शिक्षा के अधिकार कानून के तहत् इन विद्यालयों में भी संविधान के अनुच्छेद 15(4) एवं 15 (5) का अनुपालन करते हुए वंचित वर्गों अनुसूचित  जाति  जनजाति तथा अन्य पिछड़े वर्ग के लिये उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण का प्रावधान किया जाना आवश्यक है।

      जैसे कि संविधान के अनुच्छेद 15(4) एवं 15 (5) में स्पष्ट उल्लेखित है कि ’’ राज्य सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े हुए विद्यार्थियों के लिये तथा अनुसूचित जाति एवं जनजातियों और अन्य पिछड़े  वर्ग के विद्यार्थियों के लिये शिक्षण संस्थाओं में जो राज्य द्वारा अनुदानित हो या न हो प्रवेश हेतु विशेष प्रावधान करेगा।’’


       उक्त संवैधानिक नियम के आधार पर ही सिमित प्रवेश संख्या वाले सभी उच्च एवं  

व्यवसायिक, इंजीनियरिंग और मेडिकल आदि पाठ्यक्रमों में उक्त वंचित वर्गों के लिये आरक्षण का

 प्रावधान है। चूँकि  स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिन्दी एवं अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में भी सीमित सीटों के लिये प्रवेश नियम है और जवकि इन वर्गों के लिये आरक्षण का प्रावधान नहीं होना संवैधानिक नियमों का अवमानना है। 


       अतः सरकार को आवेदन दिया गया है  कि उक्त संदर्भित पत्र में संशोधन कर स्वामी आत्मानंद विद्यालयो में अनुसूचित जाति एवं जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों के लिये प्रवेश में नियमानुसार आरक्षण दिये जाने का कंडिका जोड़ने का कष्ट करें जिससे कि इन वंचित वर्गों को प्रदत्त संवैधानिक अधिकारों का लाभ मिल सके।

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