भरारी समिति में संस्था प्रबंधक को लेकर विवाद गहराया मौखिक आदेश का हवाला देकर प्रभार देने की कोशिश नियुक्ति को लेकर प्रशासनिक अमला भी परेशान

दिनेश पाटले 


 पूर्व में 80 लाख का घोटाला करने वाले को भरारी धान खरीदी केंद्र का प्रभार देने विभाग,और प्राधिकृत अधिकारी क्यों है आतुर, मौखिक आदेश देकर प्रभार देने की कोशिश




मस्तूरी क्षेत्र के सेवा सहकारी समिति भरारी पं. क्र.558के धान खरीदी प्रभारी के प्रभाव को लेकर विवादों का सिलसिला खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है एक ओर जहां क्षेत्र के किसान सुबह से लेकर शाम तक धान खरीदी के टोकन और तौल को लेकर परेशान है तो वही संस्था प्रबंधक की नियुक्ति को लेकर पूरा प्रशासनिक अमला परेशान है। सेवा सहकारी समिति भरारी में संस्था प्रबंधक के पद को लेकर मामला इतना उलझ गया है कि कब आपसी विवाद में कोई बड़ी घटना हो सकती है इसका अंदाजा विभाग को नहीं है। और अभी के मामले में 80 लाख के घोटाला करने वाले को पुनः संस्था प्रबंधक बनाए जाने को लेकर ऐसी स्थिति बनी हुई है। बिना किसी लिखित आदेश के मस्तूरी क्षेत्र के सेवा सहकारी समिति के उच्च अधिकारियों ने एक बैंक सुपरवाइजर ज्ञान करियारे को  अधिकृत अधिकारी बना दिया। अपने पद को संभालते ही बिना उच्च अधिकारियों के निर्देशित और लिखित आदेश के बगैर बैंक सुपरवाइजर अधिकृत अधिकारी का पावर दिखाते हुए सेवा सहकारी समिति भरारी  पहुंच गए और अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बिना किसी लिखित आदेश के 80 लाख रुपयों का घोटाला करने वाले पूर्व लिपिक एवं प्रभारी संस्था प्रबंधक जगजीवन कुर्रे को प्रभार दिलाने भरारी धान खरीदी केंद्र पहुंच गया। जहां पर पूर्व से ही 10, हजार क्विंटल लगभग धान खरीदी कर चुके प्रभारी संस्था प्रबंधक प्रकाश लहरें ने उनसे लिखित में आदेश दिखाने को कहा लेकिन अपने पद और पावर में चूर ज्ञान करियारे ने संस्था प्रबंधक को दबाव बनाते हुए मौखिक आदेश पर उन्हें सिर्फ आदेशित करता रहा , पूर्व से धान खरीदी कर रहे हैं संस्था प्रबंधक प्रकाश लहरें ने 80 लाख के घोटाले करने वाले जगजीवन कुर्रे को प्रभार देने से इनकार कर दिया ।और लिखित में आदेश देने की मांग की गई जिसमें मौके पर तनाव की स्थिति बन गई थी।

वही इस मामले में सेवा सहकारी समिति के अध्यक्ष प्रमोद नायक का कहना है कि मैंने किसी भी  प्रकार की मौखिक एवं लिखित आदेश नहीं दिया है।



जबकि सेवा सहकारी समिति मर्यादित बैंक मस्तूरी के सुपरवाइजर एवं भरारी समिति के प्राधिकृत अधिकारी बने ज्ञान करियारे का कहना है कि वह 80 लाख के घोटाले करने वाले को प्रभार इसलिए दे रहे हैं क्योंकि उनको सेवा सहकारी समिति के जिला अध्यक्ष प्रमोद नायक ने मौखिक रूप से आदेश दिया है।


वही वर्तमान में पदस्थ भरारी समिति के धान खरीदी प्रभारी प्रकाश लहरे का कहना है कि मुझे किसी भी प्रकार की लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। जिसके वजह से मैं किसी को यह धान खरीदी का प्रभार नहीं दे सकता क्योंकि लगभग दस हजार क्विंटल धान खरीदी हो चुकी है जिसकी जवाबदारी कौन लेगा, यह मुझे लिखित रूप से देने के लिए कोई तैयार नहीं है इस वजह से मैं अपना कार्यभार किसी दूसरे को नहीं दे सकता।

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