लोग अपनी प्यास बुझाने पानी के लिए तरस रहे हैं और नल पर ईट भट्टे वाले का कब्जा।

दिनेश पाटले



ग्रामीणों ने पंचायत के जनप्रतिनिधियों पर उदासीनता का लगा रहे आरोप।



मस्तूरी। एक ओर जहां शासन लोगों को पानी की समस्या से निजात दिलाने नल जल, अमृत मिशन, जैसे कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू कर लोगों को पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए कई जनकल्याणकारी योजनाएं चालू कर रहे हैं तो वही दूसरी ओर शासकीय नलों पर कब्जा भी करना आम बात हो गई है।,जनपद पंचायत मस्तूरी से महज दो किलोमीटर पर स्थित ग्राम पंचायत वेद परसदा के मुक्तिधाम पर आम लोगों के लिए पानी की आवश्यकता एवं जरूरत को देखते हुए शासकीय नल का खनन करवा कर हैडपम्प फिट कराया गया है, जिसमें नजदीक में ही स्थित फ्लाइ एस ईंट भट्ठे वाले ने कब्जा कर रखा है। और उसमें अपना पर्सनल कार्य को करने के लिए समर्सिबल पंप लगाकर शासकीय नल के पानी को अपने प्राइवेट कार्यों में और उद्योगों के कामों में उपयोग कर रहा है। लिहाजा इस नल की स्थिति यह हो गई है कि इमरजेंसी में प्यासे लोगों को जरूरत के समय पानी नहीं मिल पा रहा है।नल को चलाकर पानी निकालने से पानी नहीं निकल पाता, उद्योग के कामों में सबमर्सिबल पंप चलने से पानी का स्तर नीचे हो गया है जिसके कारण मुक्तिधाम में आए हुए जरूरतमंद लोगों को पानी की समस्या से जूझना पड़ता है।



*ग्रामीणों की शिकायत है कि जनप्रतिनिधि कि उदासीनता की वजह से लोग पानी के लिए तरस रहे*


ग्राम पंचायत वेद परसदा के ग्रामीणों का शिकायत है की मुक्तिधाम में गए लोगों को जब पानी की जरूरत होती है तो नल से पानी नहीं निकलता जिसके कारण दूसरी जगह से पानी लाकर मुक्तिधाम में उपयोग किया जाता है मुक्तिधाम में उपस्थित नल पर गैर लोगों के द्वारा कब्जा कर लेना पंचायत के जनप्रतिनिधियों की उदासीनता की मुख्य वजह बता रहे हैं।



*पिचई इंजिनियर को शिकायत की इंतजार*


वहीं इस मामले में जानकारी होने के बावजूद भी पीएचई विभाग के इंजीनियर प्रमोद महतो से जब जानकारी ली गई तो उन्होंने ग्रामीणों के द्वारा शिकायत करने पर शासकीय नल से सबमर्सिबल पंप को निकलवाने की बातें कही हैं।


*पंचायत प्रतिनिधि का कहना वैकल्पित व्यवस्था के लिए कुछ दिनों के लिए बस दिया गया था*


ग्राम पंचायत वेद परसदा के सरपंच प्रतिनिधि कांति कुमार साहु का कहना है कि पंचायत के निर्माण कार्यों में उनसे सहयोग लिया जाता है इसलिए सहयोग भाती कुछ दिनों के लिए पानी की आवश्यकता पड़ने पर पंचायत से गुजारिश की थी तो वैकल्पिक व्यवस्था के लिए कुछ दिन के लिए दिया गया था

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